छत्तीसगढ़ राज्य में कोसा उद्योगों की उत्पादन स्थिति

(कोरबा जिले के विशेष संदर्भ में)

बी. एल. सोनेकर1, रंजना महिलांगे2

1सहायक प्राध्यापक, अर्थशास्त्र अध्ययनशाला, पं.  रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर(छ..)

2शोध-छात्रा, अर्थशास्त्र अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर(छ..)

 

सारांश-

अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर भारत प्राचीनकाल से ही सूती वस्त्रों एवं रेशमी वस्त्रों के निर्माण में प्रमुख स्थान रहा है। भारतवर्ष के छत्तीसगढ़ राज्य का भी कोसा उत्पादन में प्रमुख स्थान रहा है। जो कि राज्यों में कोसा उत्पादन की दृष्टि से दूसरा स्थान भी प्राप्त है। छत्तीसगढ़ में मुख्यतः कोकून कोसा, टसर कोसा, मलबरी कोसा जैसे सर्वोत्तम गुणवत्ता वाली कोसा का उत्पादन अधिक मात्रा में होती हैै और कोसा विदेशों में भी निर्यात करते हैं जिससे छत्तीसगढ़ सरकार को आय के स्त्रोत भी प्राप्त होता है। अतः छत्तीसगढ़ राज्य में कोसा के उत्पादन के लिए अनुकूल जलवायु उपयुक्त मिट्टी, तापमान आदि कारक है जिसके कारण हजारों लाखों लोगों को आय प्राप्त होती है। जिससे लोगों के जीवन स्तर, खानपान एवं सामाजिक, आर्थिक स्थिति का विकास हो रहा है। इसलिए सरकार को यह भी चाहिए कि कोसा की उत्पादकता में वृद्धि करने के लिए विभिन्न विकास योजनाएं बनाए। किसानों एवं श्रमिकों को प्रोत्साहित करे इसके लिए शिक्षा की सुविधा, उत्तम स्वास्थ्य सुविधा, ऋण की उपलब्धता, मजदूरी में वृद्धि इत्यादि सुविधा दे। इससे न कि छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे भारतवर्ष का विकास होगा, साथ ही देश की प्रति व्यक्ति आय एवं राष्ट्रीय आय में भी वृद्धि होगी और देश का सर्वांगीण विकास होगा जिससे हम समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे।

 

प्रस्तावना-

कोसा उत्पादन में छत्तीसगढ़ राज्य में द्वितीय स्थान है। प्रथम स्थान बिहार को प्राप्त है विश्व में कोसा की सर्वोत्तम क्वालिटी भारत वर्ष में ही पायी जाती है। भारत में भी कोसा का प्रमुख उत्पादन छत्तीसगढ़, बिहार, झारखण्ड, पं. बंगाल ओर महाराष्ट्र में किया जाता है।

 

भारत में होने वाले कोसा उत्पादन में छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर जिले में उपलब्ध कोसा कोकून विश्व में सबसे बेहतरीन कोसा माना गया है। वहां आदिवासियों के जीविकोपार्जन का यह मुख्य व्यवसाय है। केन्द्रीय सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय रेशम परियोजना द्वारा रेशम का बहुत विकास हुआ। अविभाजित मध्य प्रदेेश सरकार ने रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 1984 में 20 जिलों में रेशम उत्पादन का कार्य प्रारंभ किया। 1962 में गति प्रदान करने के लिए रेशम संचालनालय कार्यालय जगदलपुर तहसील में है।

 

छत्तीसगढ़ का कोसा विदेषों में भी निर्यात किया जाता है। यह लघु सीमांत कृषकों के लिए अत्यन्त उपयोगी एवं अतिरिक्त आय का साधन है।

 

रेशम ग्रामोद्योग, ग्रामीण रोजगार के अवसर एवं रेशम विकास का आधार है। इस हेतु राज्य के अन्तर्गत संचालनालय ग्रामोद्योग विभाग संचालित है। जिसका उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में निवास कर रहे गरीब परिवारों को स्वरोजगार के साधन उपलब्ध कराना, रेशम योजनाओं को लघु एवं कुटीर उद्योग के रूप में ग्रामीण क्षेत्र में विकसित कर स्वरोजगार उपलब्ध कराना, कच्चे रेशम की मांग की पूर्ति हेतु सिलक उत्पादन बढ़ाने के लिए अधोसंरचना निर्माण करना, उत्पादकता में वृद्धि हेतु नई तकनीक को मैदानी स्तर पर लागू करना है।

 

छत्तीसगढ़ राज्य में रेशम विकास हेतु अपनाई जा रही रणनीति

ऽ     नैसर्गिक टसर उत्पादन एवं परम्परागत कोसा कृमि पालन की गतिविधियों को बढ़ावा देना।

ऽ     रेशम उद्योग की जनोन्मुखी योजनाओं को जन-भागीदारी एवं व्यावसायिक रूप देना।

ऽ     प्रदेश में बुनकरों की आवष्यकता के अनुरूप रेशम के धागे के उत्पादन को बढ़ावा व उसे बुनकारों को उचित दर पर उपलब्ध कराना।

ऽ     बाजारोन्मुखी उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु ककून तथा रेशम धागे के  गुणात्मक सुधार लाना व कौशल उन्नयन एवं तकनीकी हस्तान्तरण हेतु निरंतर प्रयास करना।

ऽ     रेशम कीट पालन द्वारा अतिरिक्त आय अर्जित कराने के उद्देश्य से निजी क्षेत्र में शहतून पौधरोपण को बढ़ावा देना।

ऽ     चयनित जिलों प्राकृतिक रैली/लरिया/बरफ कोसा फलों का प्रगुणन कैम्प लगाना।

ऽ     पालित डाबा बीज प्रगुणन (सीड रीलिज प्रोग्राम) के माध्यम से नये वन क्षेत्रों साजा/अर्जुना/स्नेहा/धवड़ा के पौधे वाले नवीन क्षेत्रों में योजना का क्रियान्वयन करना।

ऽ     रेशम उत्पादन में महिलाओं को सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर बल देना।

ऽ     पालित टसर विकास हेतु नवीन विधाओं का समग्र विकास करना।

ऽ     अरंडी रेशम विकास और विस्तार कार्यक्रम का क्रियान्वयन।

ऽ     उत्प्रेरण विकास कार्यक्रम के माध्यम से टसर/मलबरी/ईटी रेशम उत्पादन एवं गुणवत्ता सुधार की दिशा में पहल।

 

अध्ययन का उद्देश्य

1.      अध्ययन अवधि में कोरबा जिले एवं विकासखण्ड के आधार पर कोसा उत्पादन की प्रवृत्ति का अध्ययन करना, जिसमें टसर कोसा और मलबरी कोसा का अध्ययन सम्मिलत  है।

 

अध्ययन अवधि

यह अध्ययन वर्ष 2009-2010 से सम्बन्धित है जिसका अध्ययन कोरबा जिले के कोसा उद्योग में उत्पादन की स्थिति को 2000-2001 से 2009-2010 तक की अविध में लिया गया है।

 

शोध प्रविधि

प्रस्तुत अध्ययन द्वितीयक आॅंकड़ों पर आधारित है। आॅंकड़ों का एकत्रीकरण कोरबा जिले के स्थापित कार्यालय सहायक संचालक रेशम उद्योग एवं शासन द्वारा प्रकाशित पत्र, पत्रिकाओं से लिया गया है।

 

अध्ययन अवधि (2000-01 से 2009-10) के बीच कोेरबा जिले का कुल टसर उत्पादन 50964537 नग हुआ। जिसमें सबसे अधिक वर्ष 2008-09 में 12 प्रतिशत कोसा उत्पादन हुआ था 2039 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ जबकि सबसे कम कोसा उत्पादन वर्ष 2000-10 में 2.9 प्रतिशत प्राप्त हुआ तथा जिसमें 1283 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ।

 

वर्ष 2000-01 से 2009-10 की अवधि संपूर्ण अध्ययन अवधि में टसर कोसा उत्पादन की औसत वृद्धि दर 29.99 प्रतिशत रही। इस सम्पूर्ण अध्ययन अवधि में टसर कोसा का सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन वृद्धि दर 237.9 प्रतिशत वर्ष 2001-02 में प्राप्त की गयी थी जिसका मुख्य कारण रोजगार की संख्या में वृद्धि होना है। जबकि .सबसे कम वर्ष 2006-07 में -1.6 प्रतिशत की वृद्धि प्राप्त की गयी थी जिसका प्रमुख कारण उत्पादन लक्ष्य का पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रखा गया था जबकि रोजगार की संख्या में कमी हुई थी।

 

 अध्ययन का विश्लेषण

 

अध्ययन अवधि (2000-01 से 2009-10) के बीच कोरबा जिले का कुल मलबीर कोसा उत्पादन 19646.15 नग हुआ। जिसमें सबसे अधिक वर्ष 2006-07 में 16.6 प्रतिशत कोसा उत्पादन हुआ तथा 95 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ, जबकि सबसे कम कोसा उत्पादन वर्ष 2002-03 में 2.4 प्रतिशत प्राप्त हुआ तथा जिसमें 45 लोेगों को रोजगार प्राप्त हुआ।

 

वर्ष 2000-01 से 2009-10 की संपूर्ण अध्ययन अवधि में मलबरी कोसा उत्पादन की औसत उत्पादन वृद्धि दर 11.38 प्रतिशत रही। इस संपूर्ण अध्ययन अवधि में मलबरी कोसा का सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन वृद्धि दर 161.2 प्रतिशत वर्ष 2003-04 में प्राप्त की गयी थी। जिसका मुख्य कारण गत वर्ष में रोजगार की संख्या की तुलना में आधार वर्ष के रोजगार की संख्या में वृद्धि होना है, जबकि सबसे कम वर्ष 2007-08 में -3.4 प्रतिशत की वृद्धि दर प्राप्त की गई थी।

 

अध्ययन अवधि (2002-03 से 2008-09) के बीच कोरबा जिले के कोरबा विकासखण्ड में कुल कोसा उत्पादन 10139127 नग हुआ। जिसमें सबसे अधिक वर्ष 2002-23 में 18.5 प्रतिशत कोसा उत्पादन हुआ तथा 764 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ, जबकि सबसे कम कोसा उत्पादन वर्ष 2007-08 में 12.3 प्रतिशत प्राप्त हुआ, तथा जिसमें 1084 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ।

 

वर्ष 2002-03 से 2008-09 की संपूर्ण अवधि में कोरबा विकासखण्ड में कोसा उत्पादन की औसत उत्पादन वृद्धि दर 29.07 प्रतिशत रही। इस संपूर्ण अध्ययन अवधि में कोसा का सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन वृद्धि दर 18.4 प्रतिशत वर्ष 2006-07 में प्राप्त की गयी थी जिसका मुख्य कारण रोजगार की संख्या में वृद्धि होना है जबकि सबसे कम वर्ष 2005-06 में -6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर प्राप्त की गई थी जिसका मुख्य कारण रोजगार की संख्या में कमी होना पाया गया है।

           

अध्ययन अवधि (2002-03 से 2008-09) के बीच कोरबा जिले के कटघोरा विकासखण्ड में कुल कोसा उत्पादन 11286150 नग हुआ। जिसमें सबसे अधिक वर्ष 2004-05 में 17.3 प्रतिशत कोसा उत्पादन हुआ तथा 209 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ। जबकि सबसे कम कोसा उत्पादन वर्ष 2007-08 में 12.6 प्रतिशत प्राप्त हुआ तथा 196 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ।

 

वर्ष 2002-03 से 2008-09 की संपूर्ण अवधि में कटघोरा विकासखण्ड में कोसा उत्पादन की औसत उत्पादन वृद्धि दर -6.9 प्रतिशत रही। इस संपूर्ण अध्ययन अवधि में कोसा का सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन वृद्धि दर 16.9 प्रतिशत वर्ष 2004-05 में प्राप्त की थी जिसका मुख्य कारण रोजगार की संख्या में वृद्धि होना है, जबकि सबसे कम वर्ष 2007-08 में -13.9 प्रतिशत की वृद्धि दर प्राप्त की गई थी जिसका मुख्य कारण रोजगार की संख्या में कमी होना पाया गया।

 

निष्कर्ष

टसर कोसा के उत्पादन स्थिति से ज्ञात होता है कि कुल 10 वर्षों के आॅंकड़ों का अध्ययन किया है। जिसमें निष्कर्ष के रूप में  औसत उत्पादन वृद्धि दर 29.07 प्रतिशत पाया गया है जिसमें सबसे अधिक वार्षिक उत्पादन वृद्धि दर वर्ष 2001-02 में 237.9 प्रतिशत देखा गया, जिसका मुख्य कारण रोजगार की संख्या में वृद्धि होना तथा कोसा उत्पादन के लिए अनुकूल जलवायु का होना है।

 

मलबरी कोसा उत्पादन स्थिति के आंकड़ो से पता चलता है वर्ष 2000-01 से 2009-2010 तक 10 वर्षों के उत्पादन स्थिति के आधार पर औसत उत्पादन वृद्धि दर 50 प्रतिशत पाया गया। तथा सबसे अधिक वार्षिक उत्पादन वृद्धि दर 161.2 प्रतिशत 2003-2004 में पाया गया है। जिसका कारण पिछले वर्ष की तुलना में रोजगार की संख्या में वृद्धि तथा अनुकूल वातावरण का होना है। जिसके कारण उत्पादन में वृद्धि हुई है।

 

इसी प्रकार कोरबा जिले के कोसा उद्योग में कार्यरत श्रमिकों की आर्थिक स्थिति का विश्लेषणात्मक अध्ययन से प्राप्त हाने वाले प्रमुख निष्कर्ष का विवरण इस प्रकार है-

 

कुल निदर्श श्रमिकों मे 70.51 प्रतिशत लोग 20 से 40 आयु वर्ग के पाये गये, इस प्रकार कोसा उद्योग में कार्यरत श्रमिकों में युवा वर्ग की अधिकता है।

 

सुझाव

1.      मजदूरी दर में वृद्धि - कोसा उद्योग में कार्यरत निदर्श श्रमिकों की मजदूरी दर अत्यंत निम्न है मजदूरी दर के कारण इन श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार नहीं हो पाता है। जिससे उनकी कार्यक्षमता में भी कमी होती है साथ ही उत्पादन भी कम होता है। अतः इन श्रमिकों को मजदूरी की दर में वृद्धि करने से न केवल यह श्रमिक लगन से काम करेंगे बल्कि उत्पादन में वृद्धि होगी जिसका लाभ उत्पादक वर्ग के साथ ही पूरे देश को मिलेगा।

2.      कार्य घण्टे में अधिकता - श्रमिक लम्बे समय तक कार्य करते हैं जिससे उनलका मन काम में नहीं लग पाता वे मजबूरी वष काम करते हैं जिससे उनकी कार्यक्षमता में कमी आती है यदि इन श्रमिकों को अतिरिक्त समय का अधिक मजदूरी दर देने से न केवल इन श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा बल्कि इनकी कार्यक्षमता में भी वृद्धि होगी।

3.      ऋणों की उपलब्धता - निदर्श श्रमिकों की आय की कमी का उनकी जीवन स्तर तथा रहन सहन पर बहुत प्रभाव पड़ता है तथा वे ऋण लेने के लिए बाध्य हो जाते हैं। अतः सरकार को चाहिए कि बैकों से कम ब्याज पर इन श्रमिकों को ऋण उपलब्ध कराए साथ ही इनके लिए ऐसी व्यवस्था की जाय की इन्हें अधिक कागजी कार्यवाही या अधिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

4.      शिक्षा की सुविधा - शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक हर परिस्थितियों सेे संघर्ष किया जा सकता है। ं     

 

संदर्भ सूची -

1.      कार्यालय सहायक संचालक रेशम कोरबा जिला, वर्ष 2009-2010

2.      छत्तीसगढ़ आर्थिक सर्वेक्षण, वर्ष 2009-2010

3.      छत्तीसगढ़ विकास योजना आयोग, वर्ष 2009-2010

4.      रेशम संचालनालय, ‘‘.प्र. लाउट बेस मेन्ट’’ सतपुड़ा भवन, भोपाल दिनांक 6-11-1992, पृष्ठ क्रमांक 7,23,91

5.      रेशम विभाग, ‘‘रेशम विभाग की लाभकारी योजनाएं’’ रेशम विभाग कार्यालय जगदलपुर, 1994 पृष्ठ क्रमांक 21

 

 

Received on 16.10.2013          Modified on 15.11.2013

Accepted on 25.11.2013         © A&V Publication all right reserved

Int. J. Rev. & Res. Social Sci. 1(2): Oct. - Dec. 2013; Page 52-56